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Wednesday, December 28, 2011

अधूरापन.....

क्यों दिखता है ये अधूरापन ?
पर्वतों से गिरते झरनों के पानी,
आगे बढ़ते ही नही, थम जाते है,
हवायें बहती है, मेरे करीब आती नही,
दिये जलते है पर घर-आँगन में अंधेरा
छाया है, इक सन्नाटे की आवाज़
मेरे कान के पर्दे को चीर रही है,
मेरी चीखें मुझ तक ही गूँज
रही है, किसी को सुनाई नही देती,
मेरी परछाई कड़क धूप में मेरे
संग नही, अदृश्य है,
समंदर के किनारे दौड़ता हूँ पर
मेरे पदचिह्न दिखते ही नही,
ये कैसा शून्य-तनन है संवेदन ?
बेज़ान धड़कती क्यों धड़कन ?
क्यों दिखता है ये अधूरापन ?
                                  सुरेश कुमार
                                     २६/१२/११







Wednesday, December 14, 2011

वो भी ज़मी पर आया होगा.....

खूबसूरती ने तेरे उसपर,
कुछ ऐसा कहर ढाया होगा,
हो गयी मोहब्बत खुदा को,
जब उसने तुझे बनाया होगा,
भेज कर धरती पर तुम्हे,
वो भी बहुत पछताया होगा,
याद तेरी जब-जब आयी,
आँसु-ए-बारिश बरसाया होगा,
तेरी यादों का दामन सदा थामे,
सीने-ए-ज़िगर से लगाया होगा,
तन्हाई में अकेले इस खुदा ने,
बहुत रोया, चिल्लाया होगा,
खुदा का नाम लोग यूँ ही नही लेते,
मिलने तुझसे वो भी ज़मी पर आया होगा I
                                               - Suresh Kumar
                                                      14/12/11

Friday, December 09, 2011

वो......उनकी अदा......

कुछ यूँ मेरी गली से गुजरे वो,
घर-आँगन इश्क से महकने लगा I
उनकी नज़र मुझ पर यूँ पड़ी,
हुस्न-ए-सागर दिल मे उतरने लगा II
जो ठहरे वो और मेरे करीब़ आये,
इश्क-ए-बारिश में, फ़िसलने लगा I
और पूछा जो हाल-ए-दिल उसने मेरा,
चौखट पर खड़े-खड़े, मै तो मरने लगा II

उनकी चूड़ियों की खनक में इश्क है,
उनकी सांसों की महक में इश्क है,
इश्क की परिभाषा, उनकी हर अदा है,
बिन बोले उनकी हर भाषा में इश्क है II
                                         - Suresh Kumar
                                                09/12/11