विरह, वेदना, क्रन्दन,
रोता, बिलखता अबोध मन,
अप्रत्यक्ष जीवन,
उत्कंठित नयन,
मृत इच्छा उद्बोधन,
चहु दिशा अप्रसन्न,
मुर्झाया उपवन,
शून्य-तनन-संवेदन,
यथासमय शिरश्छेदन,
मत-भ्रमित अवलोकन,
उत्सावाग्नि चुभन,
अभिलाषा अभिशून्यन,
भावशून्य अध्यर्थन,
पराकष्ठा ठिठुरन,
दिशाहीन अन्तर्मन,
गहन तिमिर संचयन,
सर्वसुख समापन,
हर्षविहीन नव दुल्हन,
आत्म-सुख निरन्तर दहन,
प्राणप्रिये !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
यही है......................
तुम बिन मेरी परिभाषा.
सुरेश कुमार
११/०९/२०११
