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Sunday, September 11, 2011

तुम बिन मेरी परिभाषा.....














विरह, वेदना, क्रन्दन,
रोता, बिलखता अबोध मन,
अप्रत्यक्ष जीवन,
उत्कंठित नयन,
मृत इच्छा उद्बोधन,
चहु दिशा अप्रसन्न,
मुर्झाया उपवन,
शून्य-तनन-संवेदन,
यथासमय शिरश्छेदन,
मत-भ्रमित अवलोकन,
उत्सावाग्नि चुभन,
अभिलाषा अभिशून्यन,
भावशून्य अध्यर्थन,
पराकष्ठा ठिठुरन,
दिशाहीन अन्तर्मन,
गहन तिमिर संचयन,
सर्वसुख समापन,
हर्षविहीन नव दुल्हन,
आत्म-सुख निरन्तर दहन,
प्राणप्रिये !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
यही है......................
तुम बिन मेरी परिभाषा.

                  सुरेश कुमार
                  ११/०९/२०११

11 comments:

रेखा said...

समर्पण को दर्शाती हुई बेहतरीन रचना ....

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 12-09-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

Rajesh Kumari said...

bahut khoobsurat rachna.

सागर said...

samarparn ke bhaavo se pripurn rachna....

केवल राम : said...

सही कहा है आपने ....जीवन में यही समर्पण तो हमें एक दुसरे की कमी का अहसास करवाता है ....समर्पण भाव की एक अनुपम रचना आपका आभार

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

प्रेम का पर्याय यही है.सच्चा यही समर्पण.
बहुत ही सुंदर.

वन्दना said...

bahut hi khoobsoorat paribhasha.

ZEAL said...

जीवन साथी के बिना सब खुशियाँ अधूरी होती हैं।

रविकर said...

सुन्दर रचना आपकी, नए नए आयाम |
देत बधाई प्रेम से, प्रस्तुति हो अविराम ||

डॉ. जेन्नी शबनम said...

bahut pyari kavita, sundar bhaav aur shabd chayan. aisa samarpan virle hin hota hai. shubhkaamnaayen.

अभिषेक मिश्र said...

शब्दों का अच्छा संयोजन किया है.