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Saturday, January 21, 2012

ज़िन्दगी.....एक खोज़.....

ज़िन्दगी तू क्या है ?
कभी दर्द-ए-दिल,
कभी दर्द-ए-दवा है,
ऐ ज़िन्दगी तू क्या है?
अपनी बनायी राहों पर,
कभी दौड़े तू, कभी रूके,
अपने वसूलों की ख़ातिर,
खड़ी रहे तो, कभी झुके,
जिसकी दिशा समझ ना पाया,
तू इक ऐसी हवा है I
ज़िन्दगी तू क्या है ?
***********************
अब इन सपनों की नगरी में,
कुछ ख्वाब तेरे कुछ ख्वाब मेरे है,
अतीत के पन्नों मे दबी प्रेम-पंक्ति पर,
प्रेमयुक्त लाल स्याही के घेरे है,
शब्दों को कुरेद कर ज़ेहन में बसा लिया,
जिनमें से कुछ शब्द तेरे और कुछ मेरे है I
*********************************
ऐ शाम-ए-ज़िन्दगी,
अब सूरज ढल चला,
जीवन की धुंधली राहों पर,
खुद का भी ना पता,
आँखों में समन्दर लिये फ़िरते है,
खुद की तलाश में,
ऐ राह-ए-ऱकीब,
मंज़िल है गुमशुदा I
       सुरेश कुमार.......
        २१/०१/२०१२

12 comments:

रेखा said...

बेहतरीन अभिव्यक्ति ...

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बढ़िया प्रस्तुति...
आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 23-01-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

संजय भास्कर said...

... बेहद प्रभावशाली अभिव्यक्ति है ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

सही परिभाषा दी है आपने आपने ज़िन्दगी की।

Dr.J.P.Tiwari said...

जो माँ -बाप को भगवान मान ले, हमें नहीं लगता उसे जीवन और जीवन उद्देश्यों के बारे में कुछ जाने की आवश्यकता बाकी रह गयी ही. यह ती " एकै साधर सब सधे" में समाहित है. हाँ! यह दूसरों के लिए अवश्य एक परभाषा, एक अनुकरणीय उदाहरण है. आपके सफल दाम्पत्य की कामना करते हुए, मर्मस्पर्शी काव्य प्रतुती के लिए आभार. आप के नेक विचारों, श्रवन कुमारी प्रवृत्ति को नमन. आप के माता-पिता को नमन जिन्होंने ऐसे संसार दिए. मेरी बात, संवेदनाएं उन तक पहुचा अवश्य दीजिएगा. मेरा स्नेह एवं आशीर्वाद.

Naveen Mani Tripathi said...

behad prabhavshali rachana hai jindgi ki sachhi tashvir apne pesh ki hai ....badhai ke sath hi abhar.

veerubhai said...

ज़िन्दगी नामा है यह रचना तमाम रंगों से रु -बा -रु आखिरी पड़ाव ताल लाती है यह रचना आदमी की फितरत है खाब देखना नहीं छोड़ता .खुद से अपरिचित फिर भी आँखों में समन्दर समेटे घूमता है आदमी .बेहतरीन रचना है आपकी .

Rakesh Kumar said...

सुरेश जी,सुन्दर प्रस्तुति है आपकी.
पहली दफा आपके ब्लॉग पर आया हूँ.
आपको पढकर अच्छा लगा.

मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है.

anju(anu) choudhary said...

जिंदगी एक स्पष्ट आईना है इस जीवन का

G.N.SHAW said...

दिल से दिल तक सुन्दर कविता !

रचना दीक्षित said...

बहुत प्रभावशाली सुंदर प्रस्तुति. जिंदगी को बहुत खूबसूरती से परिभाषित किया है.

बधाई.

कुश्वंश said...

प्रभावशाली अभिव्यक्ति है